कबीरा संगति साधु की, जित प्रीत किजै जाय (अर्थ)

कबीरा संगति साधु की, जित प्रीत किजै जाय । दुर्गति दूर वहावती, देवी सुमति बनाय ।। अर्थ: कबीर जी कहते हैं कि साधु की संगति नित्य ही करनी चाहिए ।…

कबीरा कलह अरु कल्पना,सतसंगति से जाय (अर्थ)

कबीरा कलह अरु कल्पना,सतसंगति से जाय । दुख बासे भागा फिरै, सुख में रहै समाय ।। अर्थ: संतों की संगति में रहने से मन से कलह एवं कल्पनादिक आधि-व्याधियाँ नष्ट…

ऊँचे कुल का जनमिया, करनी ऊंच न होय (अर्थ)

ऊँचे कुल का जनमिया, करनी ऊंच न होय । सुबरन कालस सुरा भरा, साधु निन्दा सोय ।। अर्थ: अगर उच्च कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति अच्छे कर्म नहीं करेगा…